सूक्ष्म वित्त की अवधारणा, ऐतिहासिक विकास, संस्थागत ढांचे और आर्थिक प्रभाव का व्यापक विश्लेषण

  • डॉ. आनंद तिवारी, विनोद कुमार अहिरवार

Abstract

संक्षिप्त : सूक्ष्म वित्त विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन और आर्थिक सशक्तिकरण की एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में उभरा है। यह शोध पत्र भारत के संदर्भ में सूक्ष्म वित्त की अवधारणा, ऐतिहासिक विकास, संस्थागत ढांचे और आर्थिक विकास पर इसके प्रभाव का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से मध्यप्रदेश राज्य के मामले का अध्ययन करते हुए, यह पत्र स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका, सूक्ष्म वित्त के विभिन्न प्रकारों और इसके स्रोतों की जांच करता है। अध्ययन यह दर्शाता है कि सूक्ष्म वित्त वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देकर, महिला सशक्तिकरण को सक्षम करके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करके सतत आर्थिक विकास में योगदान देता है। शोध पत्र में सूक्ष्म वित्त क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया है। मुख्य शब्द: सूक्ष्म वित्त, वित्तीय समावेशन, स्वयं सहायता समूह, गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण, आर्थिक विकास
How to Cite
डॉ. आनंद तिवारी, विनोद कुमार अहिरवार. (1). सूक्ष्म वित्त की अवधारणा, ऐतिहासिक विकास, संस्थागत ढांचे और आर्थिक प्रभाव का व्यापक विश्लेषण. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 SIF:8.20, Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767 (Ref.2018), 11(02), 10-14. Retrieved from https://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/5926