भारतीय ज्ञान परम्परा और आधुनिक नवाचार

  • डॉ. दीपिका यादव सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खण्डवा (मध्यप्रदेश)

Abstract

प्रस्तावना भारतीय अर्थव्यवस्था विकासषील अर्थव्यवस्था है, जो विकास हेतु नित्य नई तकनीकों एवं संसाधनों के अविष्कार तथा प्रयोग पर बल देती है। विकास की यह प्रक्रिया एक सषक्त एवं समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की आधारषिला है। वर्तमान परिवेष में विकास हेतु उन्नत तकनीकों का निर्माण एक आधारभूत अनिवार्यता है जिस हेतु आधुनिक नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानव सभ्यता का इतिहास भी यह बताता है कि ‘‘नवाचार‘‘ ही विकास एवं आर्थिक उन्नति का मूल आधार है। प्राचीनकाल से वर्तमान युग तक प्रत्येक राष्ट्र अपनी पारम्परिक रीति-रिवाजों एवं ज्ञान के आधार पर ही नवीन तकनीकों एवं खोजों का अविष्कार करने में सक्षम बना है। भारत के विकास का मूलभूत आधार भी इसकी समृद्ध ज्ञान परम्परा है। भारत का पारम्परिक ज्ञान केवल आध्यात्मिकता या धर्म तक सीमित नहीं है बल्कि यह विज्ञान, गणित, खगोलषास्त्र, चिकित्सा, वास्तुकला, पर्यावरण संतुलन, दर्षन एवं कला जैसे अनेक क्षेत्रों में एक मार्गदर्षक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय ज्ञान परम्परा से प्रेरणा पाकर ही आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, चरक, सुश्रुत, नागार्जुन, पाणिनि एवं वात्स्यायन जैसे विद्वानों ने विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य एवं गणित के क्षेत्र में विभिन्न खोजें एवं चिन्तन किया है, जो कि आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक की नींव बना। वर्तमान समय में जब संपूर्ण विष्व नवाचार एवं तकनीकी विकास की ओर अग्रसर है तब यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारतीय ज्ञान परम्परा की विभिन्न ज्ञान शाखाओं को आधुनिक संदर्भ से जोड़कर प्रयोग किया जाए। आज सतत् विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण एवं षिक्षा आदि क्षेत्रों में यह परम्परा व्यावहारिक एवं मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करती है जिसके फलस्वरूप नये-नये अविष्कारों एवं खोजों को प्रोत्साहन मिलता है। परम्परागत ज्ञान का आधुनिक विज्ञान के साथ समागम एक नवीन विचार, नवीन तकनीक एवं समाजोपयोगी समाधान को जन्म देता है, जो कि ‘‘नवाचार एवं भारतीय ज्ञान परम्परा‘‘ का वास्तविक मेल है। इस प्रकार भारतीय ज्ञान परम्परा एवं नवाचार का संबंध गहरा है, क्योंकि परम्परा हमें मूल्य एवं सुदृढ़ आधार प्रदान करती है तथा नवाचार उस परम्परा को नवीन रूप एवं दिषा प्रदान करता है। परम्परा एवं नवाचार का यह सम्मिश्रण समाज एवं राष्ट्र के सतत् विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
How to Cite
डॉ. दीपिका यादव. (1). भारतीय ज्ञान परम्परा और आधुनिक नवाचार. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 SIF:8.20, Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767 (Ref.2018), 10(10), 10-14. Retrieved from https://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/5849