रविंद्र कालिया के कथा साहित्य में मध्यवर्गीय मूल्य

  • डॉ. कंचन सिंह

Abstract

रविंद्र कालिया की कहानियाँ मध्यमवर्गीय जीवन के यथार्थ और सूक्ष्म अनुभवों का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती हैं। उनके पात्र प्रायः महानगरों या कस्बों के मध्यमवर्गीय परिवेश से जुड़े होते हैं। ये पात्र अपने दैनिक संघर्षों, पारिवारिक जटिलताओं और आर्थिक परेशानियों के माध्यम से एक सहज और आत्मीय चित्र रचते हैं। कथाओं में सीमित साधनों के बीच जीवनयापन, सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता, रोजगार संबंधी चुनौतियाँ तथा परंपरागत और आधुनिक मूल्यों के मध्य जारी द्वंद्व प्रमुखता से उभरते हैं। कालिया की रचनाएँ समाज में तेजी से आ रहे परिवर्तनों को संवेदनशीलता के साथ रेखांकित करती हैं। उनकी कहानियों में पारिवारिक मूल्यों — जैसे ईमानदारी, पारस्परिक सम्मान और सामूहिक सौहार्द — का गहरा आग्रह दिखाई देता है, साथ ही भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की भी स्पष्ट झलक मिलती है। इसके साथ ही, शहरीकरण, शिक्षा का प्रसार, महिलाओं की बदलती भूमिका तथा तकनीकी प्रगति जैसे विषय भी उनकी कथाओं में मध्यमवर्गीय चेतना और जीवनशैली पर पड़ने वाले प्रभावों के रूप में परिलक्षित होते हैं। इस प्रकार, रविंद्र कालिया का कथा साहित्य मध्यमवर्गीय समाज की वास्तविकताओं, सांस्कृतिक मूल्यों, समस्याओं और सामाजिक संघर्षों को प्रभावी ढंग से उजागर करता है। बदलते सामाजिक-आर्थिक परिवेश में मध्यमवर्गीय जीवन की भूमिका तथा मूल्यों के समक्ष उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को भी उनकी कथाएँ गहनता से प्रस्तुत करती हैं।
How to Cite
डॉ. कंचन सिंह. (1). रविंद्र कालिया के कथा साहित्य में मध्यवर्गीय मूल्य. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 SIF:8.20, Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767 (Ref.2018), 10(1), 160-165. Retrieved from https://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/5255
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