ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था की परिस्थितीकीय विवेचना: एक समाजशास़्त्रीय अध्ययन
Abstract
ग्राम ही ग्रामीण समुदाय की संगठनात्मक इकाई है। ग्राम रूपी अनुसन्धानशाला में ग्रामीण सामाजिक सम्बन्धों का ज्ञान करना इस शास्त्र का उद्देश्य है। ग्रामीण सामाजिक सम्बन्धों का विषय ज्ञान प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम इसके ढंाचे का ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है। ग्रामीण ढंाचे पर ही समस्त सम्बन्धों का अभिनय अवलम्बित है। ग्रामीण जीवन के भौतिक ढांचे में ग्राम सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ग्रामीण समाज व सामाजिक सम्बन्धों के नियन्त्रण व संचालन में ग्राम को ही सर्वप्रथम श्रेय प्राप्त होता है। ’ग्राम’ नाम की व्यवस्था ने ही ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था को स्थायी किया है।
How to Cite
डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह. (1). ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था की परिस्थितीकीय विवेचना: एक समाजशास़्त्रीय अध्ययन. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 SIF:8.20, Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767 (Ref.2018), 10(1), 108-113. Retrieved from https://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/5089
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