राम सजीवन प्रसाद ‘संजीव’ की कहानियों में व्यक्त चिंतन के विभिन्न आयामों का अध्ययन
Abstract
इस शोध पत्र में राम सजीवन प्रसाद ‘संजीव’ की कहानियों में व्यक्त चिंतन के विभिन्न आयामों का अध्ययन किया गया है। संजीव की कहानियों में सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक चिंतन के विविध पहलू दृष्टिगोचर होते हैं। उनकी कहानियाँ समकालीन भारतीय समाज की विसंगतियों और विडंबनाओं को उजागर करती हैं। इस शोध में संजीव की प्रमुख कहानियों का विश्लेषण करके उनमें निहित चिंतन के विभिन्न स्तरों और आयामों को रेखांकित किया गया है। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि संजीव की कहानियाँ गहन सामाजिक चिंतन से युक्त हैं जो पाठकों को सोचने और विचार करने पर विवश करती हैं। मुख्य शब्दः राम सजीवन प्रसाद ‘संजीव’, हिंदी कहानी, सामाजिक चिंतन, राजनीतिक चेतना, आर्थिक विषमता।
How to Cite
नीतू सिंह, डॉ0 कुसुम लता मिश्रा. (1). राम सजीवन प्रसाद ‘संजीव’ की कहानियों में व्यक्त चिंतन के विभिन्न आयामों का अध्ययन. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 SIF:8.20, Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767 (Ref.2018), 10(1), 70-73. Retrieved from https://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/5033
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