नकद विहीन अर्थव्यवस्था द्वारा सतत् विकास की संभावना - समस्या व समाधान

  • ड़ाॅ. योगिता चन्देल, ड़ाॅ. कैलाष पटेल, श्री क्षितिज खरे

Abstract

सारांष: भारत एक कृषि प्रधान देष होने के साथ ही विकासषील देष भी जो कि समय के साथ होने वाले परिवर्तनों को चुनौतिपूर्ण रूप से स्वीकार करने में सक्षम है। “एक प्रचलित कहावत है कि जिसकी जेब नोटो से भरी हो वह धनी होता है।“ परन्तु वर्तमान परिपेक्ष में जब हम तकनिकी उन्नŸिा की बात करते है तो हमारी जेब में पैसा नही होता लेकिन फिर भी लाखों रूपये का लेन देन सरलता से पूर्ण कर लेते है क्योंकि हमारे अधिकोष (बैंक) खातों से डिजीटल भुगतान करते है। इस षोध अध्ययन के द्वारा हम यह ज्ञात करने का प्रयास कर रहे है, कि क्या वास्तव में नकदविहीन अर्थव्यवस्था भारत के द्वारा अपनाई जा सकती है और क्या इस अर्थव्यवस्था द्वारा हमारे भारत का सतत् विकास सम्भव है। साथ ही हम यह भी जानने का प्रयास भी कर रहे है कि इस व्यवस्था को अपनाने में किस तरह की समस्याएँ हमारे समक्ष उपस्थित है, और हम इनका समाधान किस प्रकार कर सकतें है जिससे नकदविहीन अर्थव्यवस्था द्वारा भारत को किय प्रकार एक मजबूत एवं विकसित अर्थव्यवस्था प्रदान कर विकास की राह पर अग्रसर कर सके। इस षोध अध्ययन द्वितीयक समंको पर आधारित है। इस शोधपत्र के निष्कर्ष के अंत में यही कहा जा सकता है कि दुनिया के अन्य देषों से प्रतियोगिता करना है और अपने देष की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना चाहते है तो हमें अपनी आदतों एवं व्यवहारों को बदलना होगा। नई तकनीकों को अपनाना होगा। यदि नवीन तकनीकों को अपनाने में समस्या एवं असुरक्षा है तो कुषल तकनीकों का प्रयोग करके जनता में फैले भय को दूर कर जागरूकता एवं सर्तकता को बढावा देकर इसे सफलता दिलायी जा सकती है। कुंजी षब्दः-नकदविहीन अर्थव्यवस्था, डिजीटल भुगतान, नोटबंदी, नवीन तकनीक, विकासषील देष।
How to Cite
श्री क्षितिज खरेड़. य. च. ड़. क. प. (1). नकद विहीन अर्थव्यवस्था द्वारा सतत् विकास की संभावना - समस्या व समाधान. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 INTERNATIONAL JOURNAL IF:7.98, ELJIF: 6.194(10/2018), Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767, 5(1). Retrieved from http://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/63