आचार्य श्री विद्यासागर जी का व्यक्तित्व, कृतित्व एवं जैन दर्शन के स्वरूप की अवधारणा
Abstract
आचार्य श्री विद्यासागर जी का व्यक्तित्व, कृतित्व और जैन दर्शन के स्वरूप की अवधारणा व्यापक और गहन है। उनके व्यक्तित्व में गहराई और सहजता की भावना थी, जो उन्हें एक उदार और संवेदनशील मानविकी बनाती थी। उनकी कृतित्वता उनके शैक्षिक योगदान, समाज सुधार, और धार्मिक प्रवृत्ति के क्षेत्र में अद्वितीय रही। जैन धर्म के सिद्धांतों में उनकी गहन ज्ञान और समझ ने उन्हें एक विचारशील और धार्मिक नेता बनाया। उनके जीवन और कार्यों में विद्यासागर जी ने समाज में सामाजिक और आध्यात्मिक समर्पण की उदाहरण प्रस्तुत किया।
How to Cite
संदेश कुमार जैन, डॉ. सीमा बड़गैंया, प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार जैन. (1). आचार्य श्री विद्यासागर जी का व्यक्तित्व, कृतित्व एवं जैन दर्शन के स्वरूप की अवधारणा . ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERINGISSN: 2456-1037 IF:8.20, ELJIF: 6.194(10/2018), Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767, 9(2), 96-107. Retrieved from http://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/4487
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