घरेलू हिंसा: वैश्विक परिदृश्य (एक मनोवैज्ञानिक अध्ययन)

  • डाॅ. ममता वर्मा एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग गुलाब देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया

Abstract

सारांश - महिलाओं के प्रति न केवल भारत वरन् सम्पूर्ण वैश्विक परिदृश्य लगभग समान सा है। प्रश्न बस एक है, कि क्या 21वीं शताब्दी में भी हम समाज को नारी वर्ग के अनुकूल बना पाये हैं? यह गम्भीर चिन्ता एवं चिन्तन का विषय है कि चाहें विकसित देश हों या चाहें विकासशील देश हो, घरेलू हिंसा से नारी कहीं भी मुक्त नहीं है। नारी की घायल स्थिति से आहत मन सोचने पर विवश हो जाता है कि ”आखिर घरेलू हिंसा के पीछे क्या मनोविज्ञान होता है? यह सोचकर आश्चर्य होता है कि ऐसी कौन सी बलवती स्थितियाँ एवं भावनायें हैं, जो लोगों में यह सोचने की शक्ति को अवरूद्ध कर देती है कि वह अपनों को ही चोट पहुँचा रहे हैं। यह चोट इतनी घातक भी हो जाती है कि, कभी-कभी प्रभावित महिला को मौत तक पहुँचा देती है। घरेलू हिंसा दुनियाँ भर में प्रत्येक सामाजिक-आर्थिक स्तर, शिक्षित-अशिक्षित वर्ग के लोगों में पाया जाता है। आँकड़े बताते हैं कि, शिक्षित एवं नौकरीपेशा महिलाएँ भी घरेलू हिंसा की शिकार हैं। मानसिक विकृति, अहम् की टकराहट, पुरुष प्रधान समाज और इसमें महिलाओं के प्रति अपराध, महिला वर्ग की उपेक्षा, उन्हें कमतर आँकना, नारी को शोषित करने की प्रबल भावना इसका मुख्य कारण रहा है। जहाँ आधी आबादी का सच इतना कड़वा हो उस दुनियाँ के विकास की बात बेमानी है। वर्तमान समय में घरेलू हिंसा की घटनाएँ बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण सभी लोग ज्यादातर घरों में ही हैं। ऐसे में हर क्षेत्र में स्थित देशों में घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं, जो कि शिक्षित समाज के लिए बेहद शर्मनाक है। संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं एवं लड़कियों के खिलाफ हर प्रकार की हिंसा के अन्त के लिए विश्व के समस्त देशों से पुरजोर अपील की है। भारत में घरेलू हिंसा से महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के दृष्टिकोण से एक अत्यन्त प्रभावकारी कानून ”घरेलू हिंसा“ से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 बनाया गया है। यह 26 अक्टूबर, 2006 से भारत में प्रभावी हुआ है। सभ्य समाज के लिए घरेलू हिंसा एक कलंक है। वैश्विक स्तर पर इसका समूल निराकरण आवश्यक है। शब्द कुंजीः घरेलू हिंसा, इगो, लिंगभेद, प्रताड़ना, भावात्मक हिंसा।
How to Cite
डाॅ. ममता वर्मा. (1). घरेलू हिंसा: वैश्विक परिदृश्य (एक मनोवैज्ञानिक अध्ययन). ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 INTERNATIONAL JOURNAL IF:7.98, ELJIF: 6.194(10/2018), Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767, 5(9). Retrieved from http://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/25