सिकरारा विकास खण्ड (जनपद जौनपुर) में उद्योगों की स्थिति

  • रेनू यादव

Abstract

आधुनिक अर्थव्यवस्था में वस्तुनिर्माण उद्योगों की भूमिका सर्वोंपरि हो गई है। आज औद्योगिक अर्थव्यवस्था वाले देश में संसार का धन एकत्रित होता चला जा रहा है, जिसके बल पर वे अपने को विकसित देश कहलाने की परिपाटी बना चुके हैं। वस्तु निर्माण घरेलू स्तर से लेकर वृहद और संष्लिष्ट स्तर तक के संस्थानों में किया जाता है। वस्तु निर्माण उद्योगों की उनके स्तर के अनुसार कुटीर उद्योग, लघु उद्योग, मध्यम उद्योग और वृहद उद्योगों में विभक्त किया जाता है। कुटीर एवं लघु उद्योग प्राचीन काल से हमारे समाज के अभिन्न अंग रहे हैं। इनको क्रियान्वित करने वाले कारीगर और शिल्पी अपनी गुणवत्ता के लिए अब भी याद किये जाते हैं। आज कुटीर और लघु उद्योगों के स्थान पर मध्यम और बड़े उद्योगों की स्थापना का जैसे पागलपन सवार हो गया है। यह कहना गलत है कि बड़े उद्योग ही अधिक रोजी-रोटी दे पाते है। भारत जैसे देश में तो यह नहीं कहा जाना चाहिए। महात्मा गाँधी इसी विचार से उत्प्रेरित थे। उन्होंने बार-बार अपने लोगों को वह न करने के लिए रोका जो पश्चिमी औद्योगिक जगत् में हो रहा था। लेकिन अपने कुटीर और लघु उद्योगों को प्रोत्साहित नहीं किया गया और आज नगरों की ओर उमड़ती ग्रामीण जनसंख्या के लिए शोधकार्य तेजी से चलाया जा रहा है कि इसे कैसे रोका जाय।
How to Cite
रेनू यादव. (1). सिकरारा विकास खण्ड (जनपद जौनपुर) में उद्योगों की स्थिति. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 INTERNATIONAL JOURNAL IF:7.98, ELJIF: 6.194(10/2018), Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767, 5(10), 32-36. Retrieved from http://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/1372
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