जौनपुर जनपद के जननांकिकीय प्रतिरूप: एक भौगोलिक अध्ययन

  • रवि प्रताप पटेल, डाॅ. ब्रह्मानन्द त्रिपाठी

Abstract

अध्ययन क्षेत्र अपने विशिष्ट प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक गुणों के फलस्वरूप प्राचीन काल से ही मानव को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। जिसके कारण कुछ प्रारम्भिक समयों को छोड़कर इस क्षेत्र की जनसंख्या में सदैव वृद्धि होती रही है। शोध क्षेत्र में 1872 से ही जनगणना प्रारम्भ होने का उल्लेख मिलता है। किन्तु 1901 से पूर्व जनसंख्या संबंधी आँकड़े समुचित रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए अध्ययन में 1901 से 2011 तक के जनसंख्या संबंधी आँकड़ों का प्रयोग किया गया है। अध्ययन क्षेत्र की जनसंख्या घनत्व को पाँच क्षेत्रों में विभक्त कर अध्ययन किया गया है अध्ययन क्षेत्र में 1901 से 2011 तक के ग्रामीण व नगरीय जनसंख्या वृद्धि को भी तालिका में व्यक्त किया गया है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि 1901 में ग्रामीण जनसंख्या 1127462 थी जो 2011 में बढ़कर 4147624 हो गई। जबकि सन्् 1901 में नगरीय जनसंख्या 74205 थी जो 2011 में बढ़कर 346580 हो गई। इस प्रकार 1901 से 2011 के मध्य ग्रामीण जनसंख्या में 267.9 प्रतिषत व नगरीय जनसंख्या में 367.1 प्रतिषत की वृद्धि अंकित हुई। जनसंख्या के क्षेत्रीय प्रतिरूप के अन्र्तगत 2001 से 2011 के मध्य जनसंख्या अंतर व वृद्धि को प्रदर्षित किया गया है। जिसमें अति उच्च जनसंख्या वृद्धि के अन्र्तगत दो विकासखण्ड सुइथाकला व शाहगंज, उच्च जनसंख्या वृद्धि के अतर्गत छः विकासखण्ड खुटहन, करंजाकला, मुगराबादश्षाहपुर, मछलीश्षहर, सिकरारा, धर्मापुर तथा मध्यम जनसंख्या वृद्धि के अन्र्तगत सात विकासखण्ड बदलापुर, महराजगंज, सुजानगंज, जलालपुर, केराकत, डोभी, सिरकोनी तथा निम्न जनसंख्या वृद्धी के अन्र्तगतचार विकास खण्ड बकसा, मड़ियाहूँ, रामनगर व मुफ्तीगंज तथा अति निम्न जनसंख्या वृद्धि के अन्र्तगत दो विकासखण्ड बरसठी व रामपुर सम्मिलित हैं। मुख्य शब्द:- जनसंख्या वृद्धि, घनत्व, ग्रामीण जनसंख्या, नगरीय जनसंख्या, उपजाऊभूमि।
How to Cite
रवि प्रताप पटेल, डाॅ. ब्रह्मानन्द त्रिपाठी. (1). जौनपुर जनपद के जननांकिकीय प्रतिरूप: एक भौगोलिक अध्ययन. ACCENT JOURNAL OF ECONOMICS ECOLOGY & ENGINEERING ISSN: 2456-1037 INTERNATIONAL JOURNAL IF:7.98, ELJIF: 6.194(10/2018), Peer Reviewed and Refereed Journal, UGC APPROVED NO. 48767, 5(10), 06-14. Retrieved from http://ajeee.co.in/index.php/ajeee/article/view/1363
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