भारत में महिला सशक्तिकरण: एक आवश्यकता

रश्मि सिंह डा. सुरेन्द्र कुमार तिवारी

Abstract


सारांश - आज महिलाओं का सशक्तिकरण 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण चिन्ताओं में से एक बन गया है। लेकिन व्यवहारिक रूप से महिला सशक्तिकरण अभी भी वास्तविकता का एक भ्रम है। हम अपने दिन प्रतिदिन के जीवन में निरीक्षण करें तो हम महिलाओं के प्रति विभिन्न सामाजिक बुराइयों को पायेगें। महिला सशक्तिकरण महिलाओं के पास संसाधन रखने और रणनीतिक जीवन विकल्प बनाने की क्षमता का विस्तार करने के लिए आभासी साधन है। महिलाओं का सशक्तीकरण मूलतः महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उत्थान की प्रक्रिया है। संविधान में विभिन्न प्रकार के अनुच्छेद सम्मिलित है। जो महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और विकास में सहायक है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में पुरूषों की शिक्षा का प्रतिशत 80 प्रतिशत तथा महिलाओं की शिक्षा का प्रतिशत 65 प्रतिशत है। अतः महिला सशक्तिकरण को बढ़ाने की आवश्यकता है। महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न प्रकार की सरकारी योजनाएं कार्य कर रही है। प्रस्तुत पेपर में महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न संवैधानिक प्रावधान और कारण, चुनौतियों को दिखाया गया है।

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