आदिवासी जिले में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों का अध्ययन- (मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले डिंडोरी के विषेष संदर्भ में)

आकृति तिवारी

Abstract


महिला सशक्तिकरण में हम उसी क्षमता की बात कर रहे, जहाँ महिलाएँ परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णय की निर्माता खुद हो। ”अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने के लिए महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। नारी सशक्तिकरण के नारे के साथ एक प्रश्न उठता है कि ”क्या महिलाएँ सचमुच में मजबूत बनी है“ और “क्या उसका लंबे समय का संघर्ष खत्म हो चुका है“। राष्ट्र के विकास में महिलाओं की सच्ची महत्ता और अधिकार के बारे में समाज में जागरूकता लाने के लिये मातृ दिवस, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आदि जैसे कई सारे कार्यक्रम सरकार द्वारा चलाये जा रहे और लागू किये गये है। महिलाओं को कई क्षेत्र में विकास की जरूरत है।है। भारत में अनपढ़ो की संख्या में महिलाएँ सबसे आगे है। नारी सशक्तिकरण का असली अर्थ तब समझ में आयेगा जब भारत में उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें इस काबिल बनाया जाएगा कि वो हर क्षेत्र में स्वतंत्र होकर फैसले कर सकें।
keywords- महिला सशक्तिकरण की समस्याएँए मध्यप्रदेश शासन की योजनाएंेंए गैर सरकारी संगठन की भूमिकाए भारत में महिला सशक्तिकरण जरूरत।


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References


तिवारी आर पी.शुक्ला डी.वी - भारतीय नारी वर्तमान समस्याए ए.पी.एच.पब्लिकेशन

संविता ठाकुर (2013) वीमेन एंड डेवलपमेंट - मिŸाल पब्लिकेशन

Problems and challenges faced by urban working women in India a Dissertation Submitted to the Department of Humanities and Social Sciences, National Institute of Technology Rourkela.

Shodhganga.inflibnet.ac.in

www.google.comand dindori.nic.in


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