महिला सशक्तिकरण मे कृषि का योगदान


Abstract


सारांश:- सृष्टि के किसी भी क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अद्वितीय रही है। कृषि उत्पादन में महिलाएँ र्वििभन्न तरिकों से अपना योगदान देती है। आधुनिक कृषि व्यवसाय में महिलाएँ बीज चयन से लेकर उत्पादन क्रिया एवं उत्पादन उपरांत समस्त क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। परन्तु तकनीकी के विस्तृत प्रयोग एवं कृषि के सम्बंध में आर्थिक निर्णय लेने में उनकी भूमिका उच्च नही है। वास्तविकता में भारत में कृषि परम्परानुगत रूप में पुरूषों का व्यवसाय रहा है, जिसमें महिलाएँ स्वयं को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती आ रही है। विभिन्न शासकीय निकायों द्वारा महिला कृषको के सशक्तिकरण के लिए विभिन्न कृषि सहायक योजनाओं का विकास जैसे -महिला खाद्य सुरक्षा समूह, महिला समन्वयक के लिए सहायता, महिला किसान योजना आदि का निर्माण महिला किसानों के आत्मविश्वास में वृद्धि का परिचायक है। प्रत्येक क्षेत्र में अपना सर्वोच्च योगदान देने वाली नारी जाति को कृषि सम्बन्धित आधारभूत सुविधा जैसेः- भूस्वामित्व, उत्पादन क्रियाएँ एवं आर्थिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता दे दी जाएँ तो वह उच्च कृषि उत्पादन में अपना अमूल्य योगदान दे सकती है।
की-वर्ड:- महिला सशक्तिकरण, कृषि उत्पादन।


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References


लागेश्वरी एस, थिरूचेन्दुरन एस. 2016 एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हेदराबाद, कृषि विकास के लिये महिला किसानो का सशक्तिकरण

वन्दना एस,1991 भारत मे अधिकतर महिला किसान एफ.ए.ओ. नई दिल्ली।

कृषि जागरण डाट काॅम

एग्रीकुप डाट काॅम


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