इंदौर को स्वच्छता में सिरमौर बनाने में महिलाओं की भूमिका

जितेन्द्र जाखेटिया

Abstract


स्वच्छता और महिलाओं का आपस में बहुत गहरा संबंध है। हम घर दृ घर में देखते हैं कि घर को साफ दृसुथरा रखने की जिमेदारी का निर्वहन महिलाओं के द्वारा ही किया जाता है। यह कोई नई बात नहीं है बल्कि अनादिकाल से हमारे देश में यह परंपरा बनी हुई है। पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है। जिस वक्त महिलाओं में शिक्षा का अभावथाए उस वक्त भी महिलाएं स्वच्छता के काम को अपनी जिमेदारी मान रही थी। जब महिलाओं ने शिक्षा को अपनाया और वे समाज में हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ बराबरी पर आने के लिए काम करने लगी तब भी महिलाओं का रुख स्वच्छता की ओर ज्यादा था। महिला और स्वच्छता एक दूसरे की पर्याय बनी हुई है। देश के अतीत पर एक नजर डाली जाए तो यह स्पष्ट होता है कि जब देश आजाद नहीं हुआ था तब भी राष्ट्रीय आंदोलन में स्वच्छता को महिलाओं ने आत्म सात किया था। उस वक्त आंदोलन के नेतृत्वकर्ता महात्मा गांधी के द्वारा अंग्रेजों के साथ संघर्ष और देश की आजादी को दूसरे पायदान पर रखा गया था। पहले पायदान पर देश के नागरिकों के स्वाभिमान को जिंदा करना स्वच्छता को अपनाना और खादी को स्वीकार करना रखा गया था।

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