महिला सशक्तिकरणः सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

डाॅ. रीना पाटिल

Abstract


प्रस्तावना
आज के समय महिला सशक्तिकरण एक चर्चा का विषय है। खासतौर से पिछड़े और प्रगतिशील देशों में, क्योकि उन्हें इस बात की बहुत दिनों बाद में समझ हुई कि बिना महिलाओं की तरक्की एवं सशक्तिकरण के देश की तरक्की संभव नहीं है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का अर्थ उनके आर्थिक फैसलों, आय, संपत्ति, और दूसरे वस्तुओं की उपलब्धता से है, इन सुविधाओं को पाकर ही वह अपने सामाजिक और राजनीतिक स्तर को ऊँचा उठा सकती हैं। जीवन के प्रत्येक स्तर पर महिलाओं की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। फिर भी दुर्भाग्य की बात यह है कि महिला सशक्तिकरण के बारें में अधिकांश देश आतज भी जागरूक नहीं हैं।


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References


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